
भारत वेनेजुएला तेल व्यापार को लेकर हाल में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान चर्चा में है। उन्होंने दावा किया कि भारत रूस की जगह वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीद सकता है।
भारत–अमेरिका ट्रेड डील के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि भारत अब रूस के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदेगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। सवाल साफ है—अगर भारत रूस से तेल खरीदना कम या बंद करता है, तो क्या वेनेजुएला उसकी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर सकता है?
रूस ने प्रतिक्रिया में कहा कि भारत किसी से भी तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है, जबकि भारत ने दो टूक कहा—देश का हित सर्वोपरि है।
🛢️ वेनेजुएला तेल व्यापार पर विशेषज्ञों की राय
एनर्जी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला भारत की ऊर्जा जरूरतों में पूरी तरह रूस की जगह नहीं ले सकता, वह केवल आंशिक मददगार हो सकता है।
- भारत में वेनेजुएला के कच्चे तेल को बड़ी मात्रा में लगातार रिफाइन करने की क्षमता फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में ही है।
- देश की अन्य रिफाइनरियों के लिए वेनेजुएला का तेल जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि उसकी गुणवत्ता काफी भारी (heavy crude) है।
- यही वजह है कि वेनेजुएला की सरकारी कंपनी PDVSA डिलीवरी के आधार पर 13–15 डॉलर प्रति बैरल तक छूट देती रही है।
📊 भारत बनाम वेनेजुएला: आंकड़े क्या कहते हैं?
- भारत रोजाना 50 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है।
- वेनेजुएला का मौजूदा कुल उत्पादन सिर्फ 8 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास है।
- वेनेजुएला अमेरिका, चीन और क्यूबा को भी तेल बेचता है—ऐसे में उत्पादन बढ़ाए बिना भारत की मांग पूरी करना व्यावहारिक नहीं।
असल बाधा इंफ्रास्ट्रक्चर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वेनेजुएला को 30–40 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर तक पहुंचने में कम से कम 5 साल और भारी निवेश चाहिए।
🗞️ अमेरिकी मीडिया का दावा
अमेरिकी मीडिया CNN ने टॉरटॉइज कैपिटल के सीनियर पोर्टफोलियो मैनेजर रॉब थम्मेल के हवाले से कहा कि वेनेजुएला का कच्चा तेल गुणवत्ता के लिहाज से रूसी तेल जैसा है और भारत की कुछ रिफाइनरियां इसे प्रोसेस कर सकती हैं।
हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि वेनेजुएला का तेल ढांचा काफी जर्जर है और 1999 से पहले के 30 लाख बैरल/दिन के स्तर पर लौटने में एक दशक और अरबों डॉलर लग सकते हैं।
